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    Home»लाइफस्टाइल»डॉ. बिनॉय के. बोरदोलोई: असम से वैश्विक नवाचार तक की प्रेरणादायक यात्रा
    लाइफस्टाइल

    डॉ. बिनॉय के. बोरदोलोई: असम से वैश्विक नवाचार तक की प्रेरणादायक यात्रा

    Ansh SinghBy Ansh SinghJanuary 21, 20254 Mins Read

    नई दिल्ली [भारत], 21 जनवरी: असम के जोरहाट में एक छोटे से लड़के के रूप में जन्मे डॉ. बिनॉय के. बोरदोलोई ने अपने ज्ञान, नवाचार, और सांस्कृतिक जड़ों के प्रति समर्पण से वैश्विक स्तर पर एक वैज्ञानिक, उद्यमी और सामुदायिक नेता के रूप में ख्याति प्राप्त की। उनकी कहानी ज्ञान और सफलता की अद्वितीय मिसाल है।

    प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

    डॉ. बोरदोलोई का जन्म जोरहाट, असम में हुआ। उनकी शैक्षिक प्रतिभा बचपन से ही दिखने लगी थी। जोरहाट गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में बी.एससी (ऑनर्स) और एम.एससी की पढ़ाई पूरी की। उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) ले गई, जहां उन्होंने रसायन विज्ञान और रासायनिक इंजीनियरिंग के संयुक्त कार्यक्रम में पीएचडी पूरी की।

    पेशेवर उपलब्धियां

    डॉ. बोरदोलोई का पेशेवर सफर कैलिफोर्निया में एवरी डेनिसन कॉर्प से शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलिस (UCLA) से एमबीए किया और मटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में विजिटिंग लेक्चरर के रूप में पढ़ाया।

    उनका करियर तब नया मोड़ लेता है जब वे बैक्सटर हेल्थकेयर कॉर्प में शामिल होते हैं। यहां उन्होंने भारत में पेरिटोनियल डायलिसिस की शुरुआत की और दक्षिण एशिया और फार ईस्ट में इसका विस्तार किया। इसके बाद, जॉनसन एंड जॉनसन में, उन्होंने बायोसर्जरी के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास में काम किया। उनके योगदान से कई पेटेंट और घाव प्रबंधन तथा ऊतक इंजीनियरिंग में प्रगति हुई।

    डॉ. बोरदोलोई ने जॉनसन एंड जॉनसन से सेवानिवृत्त होने के बाद बोरदोलोई बायोटेक LLC और बोरदोलोई बायोटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (BBIPL) की स्थापना की। यहां उन्होंने आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान को मिलाकर हर्बोजॉइंट और हर्बोकेयर जैसे उत्पाद विकसित किए।

    नवाचार और उपलब्धियां

    डॉ. बोरदोलोई के नेतृत्व में बोरदोलोई बायोटेक ने हर्बोजॉइंट और हर्बोकेयर जैसे उत्पाद बनाए, जो गठिया के दर्द से राहत प्रदान करते हैं। उनके शोध ने हर्बल एसेंशियल ऑयल्स और उनकी सूजन-रोधी गुणों को लेकर कई वैश्विक मान्यता और पेटेंट हासिल किए।

    उनका उद्यमशील दृष्टिकोण और वैज्ञानिक कौशल बोरदोलोई बायोटेक को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाता है। कंपनी का मिशन स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाते हुए ऐसे समाधान तैयार करना है, जिनकी आज की जैविक प्रणालियों में आवश्यकता है।

    सांस्कृतिक और सामुदायिक योगदान

    अपने व्यावसायिक सफलता के बावजूद, डॉ. बोरदोलोई अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहे। वे असम एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (AANA) और असम फाउंडेशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (AFNA) जैसे संगठनों के सक्रिय सदस्य रहे। उन्होंने जोरहाट जिला साहित्य सभा को दान देकर और अपने माता-पिता की याद में स्मारक बनवाकर समाज सेवा में भी योगदान दिया।

    वे नॉर्थईस्ट इंडिया एजुकेशन एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट (NIEDSWET) के प्रबंध ट्रस्टी और नामघर एसोसिएशन ऑफ अमेरिका, इंक. (NAAM) के बोर्ड अध्यक्ष हैं। उनकी पुस्तक “नामघर इन अमेरिका” असमिया संस्कृति और आध्यात्मिकता को संरक्षित करने के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

    बिनॉय

    पारिवारिक जीवन

    डॉ. बोरदोलोई का परिवार उनकी प्रेरणा का स्रोत है। उनकी पत्नी बानी और तीन शादीशुदा बच्चे हैं। उनकी बेटी न्यूयॉर्क शहर में शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टरेट कर चुकी हैं, जबकि उनके दोनों बेटे डॉक्टर ऑफ फार्मेसी हैं और बे एरिया में काम करते हैं। अपने व्यस्त जीवन के बावजूद, उन्होंने अपने परिवार के साथ दक्षिण कैलिफोर्निया और न्यू जर्सी के बीच संतुलन बनाए रखा है।

    “नामघर इन अमेरिका” का महत्व

    डॉ. बोरदोलोई की पुस्तक “नामघर इन अमेरिका” असमिया समुदाय की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा को गहराई से प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक नामघर की परंपरा और प्रवासी असमिया समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में इसकी भूमिका को रेखांकित करती है।

    आगामी ईबुक संस्करण

    पुस्तक का ईबुक संस्करण जल्द ही अमेज़न और अन्य प्रमुख ईबुक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। प्रिंट संस्करण ने पहले ही ख्याति अर्जित कर ली है, और अब ईबुक संस्करण इसे वैश्विक पाठकों के लिए अधिक सुलभ बनाएगा।

    आइए, डॉ. बिनॉय के. बोरदोलोई की प्रेरणादायक यात्रा और असमिया समुदाय की समृद्ध विरासत का जश्न मनाएं।

    <p>The post डॉ. बिनॉय के. बोरदोलोई: असम से वैश्विक नवाचार तक की प्रेरणादायक यात्रा first appeared on PNN Digital.</p>

    Ansh Singh
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